Hindi Stories – Akbar Birbal Ki

Akbar birbal stories in hindi  

शाह अकबर बीरबल के बुद्धिचातुर्य और फ़ौरन तर्कपूर्ण जवाब देने की काबिलियत पर मोहित थे. एक दिन किसी प्रसंग पर शाह अकबर बीरबल पर बहोत खुश हुए और उन्हें इनाम देने का एलान कर दिया. लेकिन बहोत दिनों के बाद भी बीरबल को इनाम न मिला.
बीरबल जान गए की शाह अकबर अपना वादा भूल गए है. इसलिए बीरबल अब ऐसे किसी मौके की तलाश में थे की कब शाह अकबर को अपना वादा याद दिलाया जाए.
एक दिन शाह अकबर नदी किनारे टहेलने के लिए निकले. बीरबल भी उनके साथ थे. चलते चलते अकबर की नजर एक ऊंट पर पड़ी. कुछ सोचने के बाद अकबर ने बीरबल से पूछा, “…बीरबल, क्या तुम बता सकते हो की इस ऊंट की गर्दन टेड़ी क्यों है..?”
बीरबल – “…जी जहाँपनाह, मै इसका उत्तर जानता हूँ..”
अकबर – “..अच्छा, क्या है उत्तर, जरा हम भी तो जाने..”
बीरबल – “..जहाँपनाह, यह ऊंट असल में किसी से किया हुआ अपना वादा भूल गया है इसलिए इसकी गर्दन टेड़ी है. जब भी कोई ऊंट अपना वादा नही निभाता तो उपरवाला उसकी गर्दन टेड़ी कर देता है. यह एक प्रकार से वादा खिलाफी करने की सजा है..”
बीरबल का उत्तर सुनकर अचानक शाह अकबर को याद आया की उन्होंने भी बीरबल को दिया हुआ एक वादा नही निभाया है. शाह अकबर ने बीरबल को फ़ौरन राजमहल चलने की कहा.
वहाँ पहुंचकर अकबर ने बीरबल के हाथो में इनाम सौंपते हुए कहा, “…अब मेरी गर्दन तो ऊंट की तरह टेड़ी नही हो जाएगी..?”
अकबर की बात सुनकर बीरबल अपनी हँसी रोक नही पाए और दोनों ठहाके लगाकर हंसने लगे. इस तरह बीरबल ने एक बार फिर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दे दिया.





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